131 गोंद के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

 गोंद के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज



परिचय (Introduction)

पेड़ से निकलने वाले गाढ़े पदार्थ को गोंद कहते हैं। गोंद वाले पेड़ों पर अक्सर सर्दी के मौसम में छाल फटकर गोंद खुद ही बाहर आ जाती है इस गोंद युक्त छाल को सुबह सूरज उगने से पहले अथवा सूरज ढलने के बाद पेड़ से निकाल लेना चाहिए और फिर इससे छाल को अच्छी तरह से साफ करके गोंद को अलग कर लेना चाहिए।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

आमाशय (पेट) का जख्म: गोंद में तारपीन के तेल की 3 से 10 बूंदों को मिलाकर चीनी की बनी हुई शर्बत के साथ सेवन करने से आमाशय के जख्म़ से बहने वाला खून का बहाव या आंतरिक बहाव रुक जाता है और रोगी को इससे आराम मिलता है।




132  फांगला के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज  

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