005 तरबूज के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

 तरबूज के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज



परिचय (Introduction)

तरबूज गर्मियों के मौसम में होने वाला फल है। तरबूज का फल आकार में गोलाकार  होता है। यह काफी भारी होता है। तरबूज में बीज पाए जाते हैं। इसे खाते समय इसके बीजों को निकाल देना चाहिए। गर्मियों के मौसम में इसके सेवन करने से प्यास शांत होती है। शरीर में गर्मी के प्रभाव को दूर करने के लिए इसका सेवन करना अधिक लाभदायक होता है। इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर में शिथिलता आ जाती है इस कारण कुछ लोग इसे अक्ल यानि बुद्धि को नष्ट करने वाला मानते हैं। भोजन करने के एक घंटे बाद इसका सेवन करना लाभकारी होता है।

गुण (Property)

यह वीर्य को बढ़ाने वाला होता है।

तरबूज में पाए जानेवाले तत्त्व

तत्त्वमात्रा (ग्राम में)
कार्बोहाइड्रेट3.8 प्रतिशत
विटामिन-ईलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम।
कैल्शियम0.1 प्रतिशत
नियासिनलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग /100 ग्राम।
पानी95.7 प्रतिशत
प्रोटीन0.1 प्रतिशत
वसा0.2 प्रतिशत
विटामिन-बीलगभग 1 ग्राम का चौथा भाग प्रति 100 ग्राम लौह।
फास्फोरस0.01 प्रतिशत

हानिकारक प्रभाव (Harmful effects)

तरबूज का अधिक मात्रा में सेवन करना हानिकारक होता है क्योंकि इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से मस्तिष्क में शिथिलता आ जाती है। तरबूज का रस दमे के रोगियों को नहीं पीना चाहिए।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

सिर दर्द :
सिर में दर्द गर्मी के कारण हो तो तरबूज के गूदा रस पीए इससे दर्द ठीक हो जाता है।
मिश्री को तरबूज के रस में मिलाकर पीने से सिर दर्द खत्म हो जाता है।

वहम (भ्रम) और पागलपन :
तरबूज का 1 कप रस, 1 कप गाय का दूध व मिश्री 30 ग्राम मिलाकर 1 सफेद कांच की बोतल में भर दें। इस बोतल को रात के समय में खुले आकाश (चांदनी) में किसी सुरक्षित जगह पर रख दें। सुबह के समय में इसे रोगी को पिलाएं। इस प्रयोग को लगातार 21 दिन तक करते रहने से पागलपन व वहम दूर हो जाता है।
10 ग्राम तरबूज के बीजों को छीलकर उसकी गिरी को निकाल लें। इस गिरी को शाम के समय में पानी में डालकर रख दें और फिर सुबह में इन गिरियों को जल में पीसकर थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सेवन करने से उन्माद या पागलपन ठीक हो जाता है।

जोड़ों का दर्द:
तरबूज का रस पीने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है।

मन (उल्टी) होना :
भोजन के बाद अगर कलेजे में जलन होकर उल्टी आ रही हो तो सुबह-सुबह 1 गिलास तरबूज का रस मिश्री मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।

कब्ज :
तरबूज कुछ दिनों तक सेवन करने से पेट की कब्ज की समस्या खत्म हो जाती है।

ज्वर (बुखार) :
यदि धूप में चलने के कारण ज्वर (बुखार) हो जाए तो तरबूज का सेवन करने से बुखार ठीक हो जाता है।

सूखी खांसी :
सूखी खांसी होने पर तरबूज का सेवन करने से सूखी खांसी ठीक हो जाती है।

इन्द्रिय (लिंग) में घाव और मूत्र में जलन :
तरबूत का रस किसी बर्तन में लेकर उसे रात के समय में ओस में रख दें और सुबह के समय में इसमें चीनी मिलाकर पी जाएं। इसका सेवन प्रतिदिन करने से लिंग का घाव और मूत्र की जलन नष्ट हो जाती है।

नंपुसकता (नामर्दी) :
तरबूज के बीजों की गिरी 6 ग्राम तथा मिश्री 6 ग्राम को एक साथ चबाकर खाने और ऊपर से दूध पीने से शरीर में ताकत की वृद्धि होती है जिसके फलस्वरूप नपुंसकता खत्म होती है।

मुंह के छाले :
तरबूज के छिलके जलाकर उसकी राख को छालों पर लगाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

पेशाब करने में कष्ट (मूत्रकृच्छ या जलन) और पथरी :
तरबूज के बीजों को गर्म पानी मे पीसकर छानकर पी लें। इससे पेशाब करने पर होने वाले कष्ट दूर हो जाते हैं। इसके सेवन से पथरी गलकर पेशाब के द्वारा बाहर निकल जाती है।
तरबूज की जड़ को ताजे पानी में पीसकर उसे तीन बार छानकर कम से कम 10 दिनों तक रोज खायें इससे पथरी गलकर बाहर निकल जाती है।

जलोदर (पेट में पानी जमा होना) :
तरबूजा को खाने से पेशाब खुलकर आता है जिसके फलस्वरूप जलोदर ठीक हो जाता है।

एलर्जी :
यदि गर्मियों का मौसम चल रहा हो तो तरबूज के रस में कालानमक डालकर पीने से एलर्जी दूर होती है।

उच्च रक्तचाप (हाईब्लड प्रेशर) :
तरबूज के बीज की गिरी और सफेद खसखस अलग-अलग पीसकर बराबर मात्रा मिलाकर रख लें। फिर इसमें से 3 ग्राम की मात्रा सुबह-शाम खाली पेट पानी के साथ लें। इससे रक्तचाप कम होता है और रात में नींद अच्छी आती है। सिर दर्द भी दूर हो जाता है। इसके सेवन से रक्तवाहिनियों की कठोरता घटने लगती है और खून की खराबी भी दूर होती है व रक्तवाहिनियां मुलायम और लचकीली बनने लगती है। इसका प्रयोग आवश्यकतानुसार चार से पांच सप्ताह तक करना चाहिए।
तरबूज के बीजों के रस में एक तत्व होता है जिसे कुरकुर पोसाइट्रिन कहते हैं। इसका असर गुर्दो पर भी पड़ता है। इससे उच्च रक्तचाप कम हो जाता है। इसके अलावा टखनों के पास की सूजन भी ठीक हो जाती है।
1 कप तरबूज के रस में 1 चुटकी सेंधानमक डालकर पीने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) कम होता है।

होंठ फटना :
तरबूजे के बीज को पानी में पीसकर होंठों अथवा जीभ पर मलने से `होठ तथा जीभ का फटना` ठीक हो जाता है।

शरीर में सूजन :
लगभग 50 मिलीलीटर तरबूज के रस में लगभग 2 ग्राम कालीमिर्च के चूर्ण को मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करने से सूजन (शोथ) दूर हो जाती है।
तरबूज के बीजों का रस या जूस पीने से गुर्दों की खराबी के कारण होने वाली सूजन खत्म हो जाती है।



006  तम्बाकू के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज  

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