006 तम्बाकू के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

 तम्बाकू के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज



परिचय (Introduction)

तम्बाकू एक तरह से क्षुप (समूह) जातीय वनस्पति है। तम्बाकू का पौधा ज्यादा से ज्यादा 90 सेंटीमीटर ऊंचा होता है। अधिकतर लोग तम्बाकू के पत्तों का सेवन बीड़ी तथा सिगरेट आदि में करते हैं। इसका उपयोग धूम्रपान में करने में अधिक किया जाता है। धूम्रपान करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

गुण (Property)

यह उल्टी लाने वाली होती है तथा श्वास, वात और सूजन को खत्म करती है।

हानिकारक प्रभाव (Harmful effects)

तम्बाकू का ज्यादा मात्रा में खाने से हृदय व श्वास पर हानिकारक प्रभाव होता है। तम्बाकू के सेवन से कई प्रकार के रोग व मृत्यु हो सकती है। तम्बाकू खाने पर चक्कर आने लगते हैं। तम्बाकू को ज्यादा खाने से संभोग क्रिया की शक्ति कम हो जाती है। बालक व युवकों को तम्बाकू पीना और खाना नहीं चाहिए क्योंकि इससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

अंडकोष की सूजन :
तंबाकू के पत्तों पर थोड़ा-सा तिल का तेल लगाकर हल्का सा गर्म करके अंडकोषों पर बांधने से सूजन दूर हो जाती है।

दांतों का दर्द :
तम्बाकू की पत्तियों को नमक के साथ बारीक पीसकर रख लें। इस मंजन से प्रतिदिन सुबह-शाम मुंह धोने से दांतों का दर्द ठीक हो जाता है तथा इससे मसूढ़ों की सूजन भी खत्म होती है।
तम्बाकू का मंजन बनाकर मंजन करने से दंतशूल (दांतों का दर्द) नष्ट होता है।

दमा (श्वांसरोग) :
तम्बाकू को जलाकर राख बना लें। इस राख की 250 मिलीग्राम की मात्रा को पान के पत्ते में रखकर प्रतिदिन खाने से दमा रोग ठीक हो जाता है।

खांसी :
पीने वाली तम्बाकू की लकड़ी को जलाकर उसकी राख को इकट्ठा कर लें। इस राख की 12 मिलीग्राम मात्रा को 2 मिलीग्राम कालानमक के साथ पीसकर सेवन करने से तेज से तेज खांसी और काली खांसी भी ठीक हो जाती है।

बालों का झड़ना (गंजेपन ) :
तम्बाकू 20 ग्राम तथा कनेर के पत्ते 20 ग्राम को जलाकर राख बना लें और इस राखा को 100 मिलीलीटर सरसों के तेल में मिलाकर गर्म करें। इसके बाद तेल को ठंडा करके सिर में लगायें इससे बाद झड़ना रुक जाता है।

रतौंधी (रात को दिखाई न देना):
देशी तम्बाकू के सूखे पत्तों को पीसकर कपड़े मे छानकर सलाई से सुबह और शाम आंखों में लगाएं। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से रतौंधी में लाभ मिलता है।

कमर दर्द :
तंबाकू के पत्तों पर हल्का-सा तेल लगाकर कमर पर बांधने से शीत लहर से उत्पन्न कमर का दर्द ठीक हो जाता है।

धनुष्टंकार :
तम्बाकू के पत्ते को पानी में उबालकर पानी को छानकर पिचकरी द्वारा रोगी के मलद्वार में हल्का पहुंचाया जाए तो धनुष्टंकार में लाभ मिलता है।

गठिया (जोड़ों का दर्द) :
3 लीटर पानी में 1 किलो तम्बाकू भिगो दें। भिगोए हुए पानी में तम्बाकू मसलकर छान लें, फिर इसमें तिल का तेल मिलाकर रोजाना सुबह-शाम मालिश करने से गठिया का दर्द दूर हो जाता है।

पीलिया (पाण्डु) :
तम्बाकू का धूम्रपान करने से पाण्डु रोग में शीघ्र लाभ मिलता है।

बच्चों के अंडकोष की सूजन :
काली तम्बाकू के पत्तें पर एरण्डी का तेल लगाकर इसे आग से सेंके फिर इसे अंडकोष पर बांधे। इस प्रकार से उपचार करने पर अंडकोष की सूजन ठीक हो जाती है।

शरीर में सूजन :
शरीर पर सूजन होने पर तम्बाकू के पत्ते को आग पर सेंककर इससे शरीर की सूजन युक्त स्थान पर सिंकाई करें। ऐसा करने से शरीर के किसी भी स्थान की सूजन दूर हो जाती है।




007   तिल के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज  

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