104 करोंदा के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

 करोंदा के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज



परिचय (Introduction)

करोंदा के पेड़ पहाड़ी भागों में अधिक होते हैं। इसके पेड़ कांटेदार और 6 से 7 फुट ऊंचे होते हैं। करोंदे के पत्तों के पास कांटे होते हैं। इसके फूल सुगंधित होती है और फल गोल, छोटे और हरे रंग के होते हैं। फल पकने पर काले रंग के हो जाते हैं। कच्चे करोंदे के आचार बनाए जाते हैं और इसकी लकड़ी जलाने के काम आती है। एक विलायती करोंदे भी होते हैं जो भारत में पाए जाते हैं। इसका फल थोड़ा बड़ा और देखने में सुन्दर होता है। इसका प्रयोग आचार और चटनी के रूप में अधिक किया जाता है।

गुण (Property)

करोंदा भूख को बढ़ाता है, पित्त को शांत करता है, प्यास रोकता है और दस्तों को बंद करता है। कच्चा करोंदा भारी होता है और भूख को बढ़ाता है। यह मल को रोकता है और रुचि उत्पन्न करता है। पका हुआ करोंदा हल्का होता है। यह वात, पित्त, कफ के दोषों को दूर करता है और खून को साफ करता है। यह विष के प्रभावों का नष्ट करता है।

हानिकारक प्रभाव (Harmful effects)

इसका अधिक प्रयोग करने से रक्त-पित्त और कफ बढ़ता है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

खुजली:

कड़वे करोंदा की जड़ को पानी या तिल के तेल में घिसकर लगाने से खुजली नष्ट होती है।

घाव के कीड़े:

करोंदा की जड़ को चन्दन की तरह पानी में घिसकर लेप करने और पतला करके घाव पर डालने से कीड़े खत्म होते हैं।

सांप के काटने पर:

सांप काट लेने पर कड़वे करोंदा की जड़ पानी में घिसकर रोगी को पिलाना चाहिए। इससे सांप का जहर उतर जाता है।

विसर्प सुर्खवाद:

करोंदा की जड़ को नींबू के रस में कपूर के साथ पीसकर पानीदार फफोले या फोड़े पर लगाने से लाभ होता है।

पुनरावर्तक ज्वर:

करोंदा के पत्तों का काढ़ा बनाकर 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में पुनरावर्तक ज्वर से पीड़ित रोगी को पिलाने से बुखार शांत होता है।

खांसी:

करोंदा के पत्ते के रस में शहद मिलाकर चाटने से खांसी दूर हो जाती है।

मसूढ़ों से खून आना:

करोंदा के फल खाने से मसूढ़ों से खून निकलना ठीक होता है।

अम्लपित्त (खट्टी डकारें):

करोंदा का रस आधा चम्मच और पिसी हुई इलायची के दाने 2 चुटकी को मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त का रोग समाप्त होता है।

जलोदर:

  • करोंदे के पत्तों का रस पहले दिन 10 ग्राम की मात्रा में पीएं, फिर प्रतिदिन 10-10 ग्राम की मात्रा बढ़ाते हुए 100 मिलीलीटर तक पीएं। इस तरह एक महीने तक लगातार करोंदे के पत्तों का रस पीने से पेट में पानी भरना ठीक होता है।
  • कड़वे करोंदे की जड़ को गोमूत्र में घिसकर जलोदर के रोग से पीड़ित रोगी को पिलाने से जलोदर ठीक होता है।

हृदय रोग:

करोंदा हृदय रोग को दूर करने में बहुत उपयोगी है। करोंदे की सब्जी गुड़ डालकर बनाकर खाने से लाभ होता है।

मिर्गी (अपस्मार):

  • करोंदे के 50 पत्ते को पीसकर छाछ में मिलाकर प्रतिदिन 15 दिन तक पीने से मिर्गी के दौरे आना बंद हो जाते हैं। यह पित्त द्वारा पैदा होने वाले मिर्गी के दौरे में विशेष रूप से लाभकारी होता है।
  • करोंदा के 30 पत्ते छाछ में पीसकर 15 दिनों तक लगातार खाने से मिर्गी का रोग दूर होता है। यह प्रयोग पित्त जनित मिर्गी में विशेष रूप से उपयोगी है।






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