094 कटहल के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

 कटहल के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज



परिचय (Introduction)

कटहल के पेड़ बहुत बड़े होते हैं और पेड़ लगाने के 5 से 6 साल बाद ही इसमें फल लगते हैं। इसके फल लम्बे व मोटे होते हैं जिसे कटहल कहते हैं। कटहल के छिलके कांटदार होती है। कटहल के पत्ते हरे रंग के थोड़े लम्बे व गोलाकार होते हैं। कटहल का प्रयोग बहुत से कामों में किया जाता है। कच्चे कटहल की सब्जी बनाई जाती है और पक जाने पर अन्दर का गुदा खाया जाता है। कटहल के अन्दर बीज होते हैं जिसकी सब्जी बनाई जाती है। कटहल के गूदे से खीर भी बनाई जाती है। इसकी लकड़ी पीली होती है और घर के फर्निचर बनाने के काम आती है। कटहल की एक दूसरी जाति भी होती है जिसके फलों को खाया जाता है। कटहल को खाने के बाद पानी पीना हानिकारक होता है क्योंकि इससे पेट फूल सकता है। कटहल की 2 जातियां होती हैं।

गुण (Property)

कटहल के बीज कड़वा एवं मुंह के रोग को दूर करने वाला होता है। कटहल का पानी मीठा और त्रिदोष नाशक होता है।

हानिकारक प्रभाव (Harmful effects)

कटहल खाने के बाद पान खाने से शरीर में जहर बन जाता है। ऐसे में जहर को दूर करने के लिए खट्टे बेर खिलाना चाहिए।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

मुंह के छाले:

कटहल की छाल घिसकर छाले पर लगाने से छाले दूर होते हैं। इसका प्रयोग होंट फटने पर भी किया जाता है।

जलोदर:

पके कटहल के अंकुरित बीज और खिरैंटी की छाल को पानी में पीसकर 250 मिलीलीटर रस निकाल लें। यह रस जलोदर से पीड़ित रोगी को सुबह-शाम पिलाएं। इससे जलोदर रोग ठीक होता है।

दस्त में आंव आना:

कटहल के पेड़ और आम के पेड़ की छाल को मिलाकर रस निकाल लें। यह रस बच्चे की शक्ति के अनुसार 10 ग्राम की मात्रा में 2 ग्राम चूने के पानी के साथ पिलाएं। इसके सेवन कराने से दस्त में आंव आना बंद होता है।

दस्त में खून आना:

आम और कटहल की छाल का रस निकालकर चूने के पानी के साथ पीने से दस्त में खून आना बंद होता है।

खांसी:

कटहल की जड़ के छोटे-छोटे टुकड़े करके मिट्टी के बर्तन में रख देते हैं। फिर बर्तन के मुंह को ढककर कपड़ा लपेटकर मिट्टी भरकर 10 किलो उपलों की आग में रखकर पकाएं। जब यह पक जाए तो इसमें से कटहल की जड़ को निकाल लें और बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण चौथाई ग्राम की मात्रा में अदरक के रस व शहद के साथ मिलाकर सेवन करें। इससे भयंकर खांसी भी नष्ट हो जाती है। इससे सांस रोग में भी आराम मिलता है।

एक्जिमा (पामा):

  • कटहल के पत्तों पर घी लगाकर एक्जिमा पर बांधने से आराम मिलता है।
  • कटहल के कोमल पत्तों को पीसकर एक्जिमा पर लगाने से 5-7 दिन में एक्जिमा ठीक हो जाता है।

दाद:

कटहल के पत्ते को गर्म करके पीस लें और इसे दाद पर लेप करें। इससे दाद ठीक होता है।

फोड़े-फुंसियां:

कटहल की लकड़ी को पीसकर चूर्ण बना लें और फिर इस चूर्ण को कबूतर की बीट में मिलाकर फोड़े-फुन्सियों पर लेप करें। इससे फोडे़-फुंसियां नष्ट होती है।

अधिक कटहल खाने से कब्ज होने पर:

यदि अधिक कटहल का सेवन करने से कब्ज हो गया हो तो नारियल की गिरी खाना चाहिए या घी गर्म करके पीना चाहिए। इससे कब्ज दूर होती है।




095  करेला के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज  

https://ayourbedic-ayoshadhiya.blogspot.com/2025/04/095.html




Comments

Popular posts from this blog

181 अजवाइन के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

001 वत्सनाभ के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

002 बच के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज