057 पिपरमिंट के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

 पिपरमिंट के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज



परिचय 

पिपरमिंट विश्व में यूरोप,एशिया,उत्तरी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है | समस्त भारत में यह बाग़-बगीचों में विशेषतः उत्तर भारत तथा कश्मीर में लगाया जाता है | यह अत्यंत सुगन्धित क्षुप होता है | इसके तेल,सत तथा स्वरस आदि का चिकित्सा में उपयोग किया जाता है | इसके पुष्प बैंगनी,श्वेत अथवा गुलाबी वर्ण के तथा पुष्पदण्ड के अग्र भाग पर लगे होते हैं | इसके फल चिकने अथवा खुरदुरे तथा बीज छोटे होते हैं | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल सितम्बर से अप्रैल तक होता है |

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

  1. गर्भावस्था में उल्टी होना : 1 कप पानी में जरा-सी पिपरमिंट डालकर उबालकर औरत को पिलाने से गर्भावस्था में उल्टी होना बंद हो जाती है। यह प्रयोग करने के काफी देर तक भोजन नहीं करना चाहिए।

    2.  पाचन सम्बंधी (पतले दस्त का आनागैसदर्दअम्लपित्त (एसिडिटिज़)कब्ज़) : पिपरमिंट खाने से आंत की मांसपेशियों में लचीलापन आता हैं, आंतो की सूजन और ऐंठन दूर हो जाती है।

    3. पेट में गैस :

  • पिपरमिंट का तेल 2 से 3 बूंद को चीनी के साथ मिलाकर दिन में 3 से 4 बार लेने से पेट की गैस कम हो जाती है।
  • पिपरमिंट के 2 छोटे-छोटे टुकड़े करके पानी से निगलने से गैस और कब्ज का रोग ठीक हो जाता है।
  1. पाचन क्रिया के लिए : पिपरमिंट के तेल की 2 बूंद 4 चम्मच पानी मे मिलाकर पी जायें। पिपरमिंट तेल की 2 बूंद रूमाल पर डालकर सूंघने से पाचन-क्रिया (भोजन पचाने की क्रिया) ठीक हो जाती है।

    कब्ज : पान में पिपरमिंट डालकर खाना भी कब्ज के रोग में लाभकारी होता है।

    6. ताजगी : पिपरमिंट के तेल की शरीर में मालिश करने से ताजगी और खुशी का अनुभव होता है।

    7. नाक के रोग :

  • जुकाम होने पर पिपरमिंट को नाक से सूंघने से आराम आता है।
  • पिपरमिंट के थोड़े से दाने और एक टिकिया कपूर को किसी कपड़े में बांधकर बार-बार सूंघने से जुकाम में आराम आ जाता है। आंख और नाक से पानी निकलना भी बंद हो जायेगा और नाक से सांस लेने में भी आसानी होगी।
  1. पेट में दर्द : पिपरमिंट का फूल पानी या बताशे में डालकर खाने से पेट के दर्द में राहत होती है।

    9. गठिया (घुटनों के दर्द) : सरसों के तेल में पिपरमेंट के तेल को मिलाकर लगाने से गठिया के रोगी के लिए लाभकारी होता है।

    10.  हाथ-पैरों की ऐंठन : तीसी के तेल और तारपीन को बराबर मात्रा में मिलाकर थोड़ा-सा कपूर और पिपरमिंट को डालकार मालिश करने से हाथ-पैरों की ऐंठन मिट जाती है।

    11.  सिर का दर्द : सिर में दर्द होने पर पिपरमेंट (मैनथोल) को सिर पर लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।

    12.  नाड़ी के दर्द में : पिपरमिंट, तारपीन का तेल और कपूर तीसी (अलसी) का तेल मिलाकर नाड़ी दर्द में मालिश करने से दर्द में आराम मिलता है।





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