003 उलटकंबल के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

 उलटकंबल के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज



परिचय (Introduction)

उलटकंबल शीत (ठण्डे) प्रदेश की वनस्पति है लेकिन गर्म प्रदेशों में 3000 फुट से 4000 फुट की ऊंचाई तक उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल, आसाम, खसिया तथा सिक्किम आदि में इसके जंगली व लगाये हुए पौधे मिलते हैं। इसके पौधे में बरसात के सीजन में फूल आते हैं तथा जाड़े के सीजन में फल आते हैं।

गुण (Property)

उलटकंबल तीखा होता है। यह योनिरोग, गर्भाशय के रोग, पेट के रोग, बवासीर, पेट की जलन और मासिक-धर्म की गड़बड़ी से उत्पन्न बांझपन दूर होता है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

मासिक-धर्म और गर्भाशय के विकार :
उलटकंबल की जड़ की छाल का रस गर्म कर लें। इस रस को 2 मिलीलीटर की मात्रा में रोजाना देने से हर तरह के कष्ट से होने वाले मासिक-धर्म में राहत मिलती है।
उलटकंबल की जड़ की छाल को 6 ग्राम की मात्रा में एक ग्राम कालीमिर्च के साथ पीस लें। इसका सेवन मासिक-धर्म से एक सप्ताह पहले से और जब तक मासिक-धर्म होता रहता है तब तक पीने से मासिक धर्म-नियमित होता है। इससे बांझपन दूर होता है और गर्भाशय को शक्ति प्राप्त होती है।
अनियमित मासिक-धर्म के साथ ही, गर्भाशय, जांघों और कमर में तेज दर्द हो तो उलटकंबल की जड़ का रस 4 मिलीलीटर निकालकर चीनी के साथ सेवन करने से 2 दिनों में ही लाभ होता है।
उलटकंबल की पच्चास ग्राम सूखी छाल को जौ कूटकर 625 मिलीलीटर पानी में काढ़ा तैयार करें। यह काढ़ा उचित मात्रा में दिन में तीन बार लेने से कुछ ही दिनों में मासिक-धर्म उचित समय पर होने लग जाता है। इसका प्रयोग मासिक-धर्म शुरू होने से एक सप्ताह पहले से मासिक धर्म आरम्भ होने तक देना चाहिए।
उलटकंबल की जड़ की छाल का चूर्ण 4 ग्राम और कालीमिर्च के 7 दाने सुबह-शाम पानी के साथ मासिक-धर्म के समय 7 दिनों तक सेवन करें। दो से चार महीनों तक यह प्रयोग करने से गर्भाशय के सभी दोष मिट जाते हैं। यह प्रदर और बांझपन की सर्वश्रेष्ठ औषधि है। पथ्य : भोजन में केवल दूध और चावल लें तथा ब्रह्मचर्य से रहें।

गर्भस्थापना:
उलटकंबल की जड़ की छाल 1.5 ग्राम, पान के डंठल 3 से 4 पीस और कालीमिर्च 3 पीस। इन सबको ताजे पानी के साथ पीसकर 50 मिलीलीटर पानी मिलाकर सुबह खाली पेट लें। इसके मासिक-धर्म के शुरू होने से 7 दिन पहले से प्रयोग करें। इससे गर्भ ठहरता है।

सूजाक:
उलटकंबल के ताजे पत्ते और टहनियों की छाल को एक साथ बारीक पीसकर शीतल जल से छान लें। इसका सेवन सूजाक रोग में बहुत उपयोगी होता है।

बहुमूत्र इक्षुमेह और मधुमेह:
10 से 20 मिलीलीटर उलटकंबल का रस निकालकर सुबह-शाम सेवन करने से रोग में जल्द लाभ होता है।

योनि दर्द:
उलटकंबल की जड़ का रस 5 और 10 मिलीलीटर चीनी को मिलाकर पीने से योनि के दर्द में आराम मिलता है।



004  उड़द की दाल के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज  

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